होलिका की कहानी:

बचपन में जब स्कूल में थे , तब एक कहानी पढ़ा करते थे कि होलिका क्यों जलाई जाती है? होली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है?

तो कहानी कुछ ऐसी थी कि जो प्रहलाद थे वह हिरण्यकश्यप के पुत्र थे । और हिरण्यकश्यप एक राक्षस थे । जबकि पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु के भक्त थे।

हिरण्यकश्यप महा अहंकारी राजा थे । उनको इस बात से बहुत तकलीफ थी कि उनका बेटा प्रहलाद विष्णु की पूजा करता है।

हिरण्यकष्यप् चाहते थे कि उनका बेटा उनकी प्रजा की ही तरह उनको ही भगवान माने । पर ऐसा हुआ नहीं ।

इसलिए उनकी अपने बेटे से नफरत इतनी बढ़ गई कि उन्होंने अपने बेटे को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को बुलाया ।

होलिका दहन की कथा:

होलिका के पास एक ऐसी चुनर थी जिसको पहनकर अगर वो आग में बैठती तो आग उसे जला नहीं सकती थी ।

और होलिका अपनी गोद में प्रहलाद को लेकर चुनर पहनकर आग में बैठ गई, ताकि आग होलिका को ना जला पाए मगर प्रहलाद आग में जलकर भस्म हो जाए।

मगर प्रहलाद ने संकट में अपने आराध्य भगवान विष्णु को याद किया और होलिका की चुनर उड़ कर प्रहलाद के ऊपर आ गिरी ।

और इस तरह होलिका आग में जलकर भस्म हो गई मगर प्रहलाद जीवित बच गए ।

नरसिंह अवतार और हिरान्यकश्यप वध:

हिरण्यकष्यप् यहीं नहीं ठेहरे ।उनकी बहन के मरने के बाद भी उन्होंने प्रहलाद को मारने की कोशिश की।

तब प्रहलाद ने भगवान विष्णु को याद किया। कथा कहती है कि भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया। और हिरण्यकश्यप का पेट चीर कर उसको मार डाला।

होली की कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है? 

यह कहानी हमें क्या सिखाती है ? यह कहानी हमें यह सिखाती है , कि अहंकारी इंसान अपने अहंकार के आगे अपने अपनों के भी बलि चढ़ा देता है।

होलिका दहन कि घटना हमें यह सिखाती है कि जो दूसरों के लिए बुरा सोचते हैं वो अपनी लगाई आग में खुद ही जलकर भस्म हो जाते हैं ।

और सबसे बड़ी बात, होली की कहानी हमें यह सिखाती है कि जो भगवान में आस्था रखते हैं , ईश्वर उनकी हमेशा रक्षा करता है ।

होली का त्यौहार कैसे मनाते हैं?

आजकल के लोग कैसे होली मनाते हैं? होलिका दहन में होलिका को तो जलाते हैं पर होली की घटना से सीखते नहीं हैं ।

आज लोग अपने अहंकार में अपनों के साथ ही गलत करते हैं ।

होली के दिन लोग रंग खेलते हैं, पर त्योहार के नाम पर लोग नशे में चूर हो जाते हैं ।

लोग भांग का नशा करते हैं, फिल्मी गाने बजाते हैं । लोग भगवान शिव के नाम पे भांग पीते हैं! क्या शिव भांग पीते थे? मुझे नहीं पता कौन सी शास्त्र में लिखा है कि शिव के नाम पर भांग पीना चाहिए? 

लोग नशे में पूरी तरह से चूर होकर होली का त्यौहार मनाते हैं।

होली का त्योहार प्रहलाद की भक्ति का त्योहार है । इस दिन कोई ईश्वर को याद नहीं करता, जबकि होली का त्योहार तो होली के घटना पर मनाया जाता है जो प्रहलाद की भगवान के प्रति आस्था को और बुराई के नाश को बताता है ।

होली और नशा:

लोग शराब पीकर पूरी तरह चूर हो जाते हैं। और हुड़दंग मचाते हैं । कोई भी त्यौहार होश में आने का दिन होता है। जागने का दिन होता है । बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव मनाने का दिन होता है।

लेकिन हमारे समाज में त्योहारों का मतलब तो कहीं गुम ही हो गया है । लोगों ने त्योहारों को एक मौका बना लिया है, बस छुट्टी मनाने का, हुड़दंग मचाने का, शराब पीने का, भांग पीने का, नशाखोरी करने का, मांस खाने का ।

त्योहारों के सही मायने तब है, जब हम उनके असली मतलब को समझे । ईश्वर का पूजन करें ।उसे याद करें।

तामसिक आहार से दूर रहे । शराब मांस से दूर रहें । जबकि त्योहारों के मौके पर लोग सबसे ज्यादा मांस और शराब का सेवन करते हैं ।

त्योहारों को भी अपने बुरे मकसद के लिए , अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते हैं ।

सही ढंग से होली कैसे मनाये?

सही तरीके से होली मनाएं ।
अपने अहंकार का त्याग कीजिए।
सही रास्ते पर चलिए।
अहंकारी इंसान चाहे आपका कोई अपना ही क्यों ना हो चाहे राजा ही क्यों ना हो, आपके परिवार का मुखिया ही क्यों ना हो, आंख बंद करके उसकी बात को मानना बंद करिए।
ईश्वर पर आस्था रखिए।
सही रास्ते पर चलिए, चाहे वह आपके खुद के परिवार के खिलाफ ही क्यों न जाए।

यह है होली मनाने का सही तरीका! 

ईश्वर की भक्ति कीजिये । 
शराब से मांस से दूर रहिये । 
सात्विक जीवन का रुख कीजिए।
यह है असली होली मनाने का सही तरीका।
स्वस्थ रहिए खुश रहिए...! 

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