Durga Saptashati katha

Saptashati 1 adhyay

अपने मां दुर्गा की मां अंबाजी की आरती तो सुनी ही होगी!

उसमें आपने सुना होगा कि दुर्गा जी की आराधना करते वक्त कहते हैं !

" मधु कैटभ दोउ मारे ! सुर भयहीन करे!" Madhu kaitabh dou mare

Madhu kaitabha vadh

तो क्या आप मधु कैटभ की कथा जानते हैं!

कौन थे मधु कैटभ !

मधु कैटभ की कथा आती है दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय से!

चलिए आपको कैटभ की कथा सुनाते हैं !

तो कथा कुछ इस प्रकार है!

एक बार जब सृष्टि के प्रलय काल में विष्णु भगवान समुद्र में शेषनाग Sheshnaag की शैय्या पर योग निद्रा में सो रहे थे!

तब उनके कान के मैल से दो राक्षस पैदा हो गए !

जिनका नाम था मधु और कैटभ !

ये दोनों राक्षस बड़े ही उद्दंडी थे!

और इन्होंने अस्तित्व में आते ही तहलका मचाना शुरू कर दिया था !

विष्णु भगवान की नाभि से निकले कमल में ब्रह्मा Brahma जी विराजमान थे !

मधु और कैटभ ! यह दोनों राक्षस ब्रह्मा जी को मारने के लिए उनकी तरफ बढ़ने लगे!

तब ब्रह्मा जी ने अपने आप को बचाने के लिए विष्णु भगवान को याद किया !

ब्रह्मा जी ने देखा कि विष्णु भगवान तो योग निद्रा में सो रहे हैं !

तब ब्रह्मा जी देवी महामाया जो कि विष्णु भगवान की योग निद्रा है उनका आवाहन किया!

उन्होंने देवी मां की स्तुति करके उनसे कहा कि ,

है देवी मां ! आप ही योग निद्रा yog nidra है !

आप ही सृष्टि की रचयिता है !

आप ही सृष्टि की प्रलयकर्ता हैं!

मैं आपका आवाहन करता हूं!

कृपा करके विष्णु भगवान Vishnu Bhagwan को योग निद्रा से उठा दीजिए !

ब्रह्मा जी के आवाहन से खुश होकर ब्रह्मा जी की सहायता करने के लिए देवी योग निद्रा विष्णु भगवान की आंखों से बाहर आ गई !

और विष्णु भगवान की नींद खुल गई!

तब विष्णु भगवान ने देखा कि वहाँ दो राक्षस मधु और कैटभ Madhu Kaitabha हैं !

और वो दोनों राक्षस ब्रह्मा जी को खाने के लिए उनकी ओर बढ़ रहे हैं !

तब ब्रह्मा जी को बचाने के लिए विष्णु भगवान ने इन दोनों राक्षसों के साथ पांच हजार वर्ष तक युद्ध किया !

तब ब्रह्मा जी की प्रार्थना करने पर देवी योग माया ने, जिन्हें देवी महामाया Devi Mahamaya भी कहते हैं ,

मधु और कैटभ को भी अपने प्रभाव से मोह और माया के वशीभूत कर दिया!

तब मधु और कैटभ Madhu Kaitabha के मन में विष्णु भगवान के प्रति आकर्षण भाव पैदा हुआ !

और उन्होंने विष्णु भगवान से कहा ,

" हे विष्णु ! तुम्हारे बाहुबल से हम अति प्रसन्न हैं !...

... तुम जो चाहे हमसे वर मांगो!"

तभी विष्णु भगवान ने मधु और कैटभ से वर मांगा ,

" हे मधु और कैटभ ! मुझे यह वर दो कि मैं तुम दोनों का वध कर दूं!...

... तुम दोनों मेरे हाथों से मारे जाओ! ...

... मुझे यही वर चाहिए!"

अब मधु और कैटभ दोनों विष्णु भगवान के धोखे में आ गए!

पर उन्होंने यह समझा कि वह ती चालक है!

उन्होंने देखा कि प्रलय काल Pralay kaal में सारी धरती पानी से भरी हुई है!

कहीं भी धरती नहीं दिखाई पड़ती!

तब मधु और कैटभ ने अपनी चतुराई दिखाते हुए विष्णु भगवान से कहा !

" ठीक है विष्णु! तुम हमें वहां मारो जहां पर पानी न हो!"

इतना सुनते ही विष्णु भगवान Vishnu Bhagwan ने उन दोनों को तथास्तु कहा!

और उन दोनों का सिर अपनी जांघों पर रख कर अपने सुदर्शन चक्र Sudarshan Chakra से काट दिया!

इस प्रकार विष्णु भगवान ने देवी महामाया Devi Mahamaya देवी योग माया Devi Yog Maya की सहायता से ब्रह्मा जी को इन राक्षसों के आतंक से बचाया!

आपको यह कथा कैसी लगी! कमेंट करके जरूर बताइएगा! 

जय श्री हरि!

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