कुंडली का तृतीय भाव ¤ कुंडली का तीसरा भाव ¤ कुंडली के तीसरे भाव का अर्थ ¤ कुंडली के तीसरे भाव से क्या देखा जाता है? ¤
कुंडली का तीसरा भाव क्या बताता है ?
कुंडली का तृतीय भाव
कुंडली का तीसरा भाव ¤
कुंडली के तीसरे भाव का अर्थ ¤
कुंडली के तीसरे भाव से क्या देखा जाता है? ¤
पराक्रम :
कुंडली का तीसरा भाव पराक्रम भाव कहलाता है । यह किसी व्यक्ति के भीतर जोखिम उठाने के साहस और क्षमता को दर्शाता है।
भाई बहन से सम्बंध:
कुंडली का तीसरा भाव किसी इंसान के उसके छोटे भाई बहनों के साथ संबंधों को भी दर्शाता है।
संवाद और संचार:
इसके अलावा तीसरा भाव संवाद और संचार का भी परिचायक होता है । एक व्यक्ति का दूसरों के साथ किस तरीके का बोलचाल है। उसके अंदर दूसरों से संवाद करने की कितनी कुशलता है । कुंडली के तीसरे भाव से यह भी देखा जाता है।
लेखन कला में रूचि:
चूंकि तीसरा भाव संवाद और संचार का परिचायक है। यह भाव लेखन कला में रुचि गुणवत्ता को भी दर्शाता है।
समाचार और मीडिया:
कुंडली में तीसरा भाव प्रबल हो तो ऐसा व्यक्ति मीडिया के में अच्छा नाम कमा सकता है।
बुद्धिमानी व्यवहार और कार्यकुशलता :
कुंडली का तीसरा भाग व्यक्ति की बुद्धिमानी, उसकी सोच समझ, उसकी कार्यकुशलता और समस्याएं सुलझाने की उसकी निपुणता को भी दर्शाता है।
लघु यात्राएं :
कुंडली के दूसरे तीसरे भाव से व्यक्ति की छोटी दूरी की यात्राओं को भी देखा जाता है।
0 टिप्पणियाँ