कुंडली के दूसरे भाव में राहु का फल क्या है?

dusre bhav me rahu ka fal

सबसे पहले दो बातों को समझना जरूरी है। 

पहली कि कुंडली का दूसरा भाव क्या बताता है?
और दूसरी कि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु का क्या प्रभाव होता है?

सबसे पहले जानते हैं कि किसी व्यक्ति कुंडली का दूसरा भाव किस बारे में जानकारी प्रदान करता है ।

कुंडली का दूसरा भाव क्या बताता है?

किसी व्यक्ति की कुंडली का दूसरा भाव उस व्यक्ति के जीवन में धन, संपत्ति , पैतृक संपत्ति और कुटुंब को बताता है।

इस का अर्थ है कि कुंडली के दूसरे भाव से उस व्यक्ति के पास कितनी संपत्ति है, कितनी जमीन जायदाद है, कितनी पैतृक संपत्ति का मालिक है, इस बात का अनुमान लगाया जाता है।

क्योंकि दूसरा भाव कुटुंब भाव होता है, इसीलिए यह वंश, दादा परदादा से मिली हुई जमीन जायदाद, विरासत में मिली संपत्ति को बताता है।

दूसरी बात यह समझना जरूरी है कि,
किसी व्यक्ति के जीवन में राहु ग्रह क्या प्रभाव डालता है ?

राहु को नकारात्मक ग्रह माना जाता है। यह कोई वास्तविक ग्रह नहीं है । यह चंद्रमा की छाया है। 

किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु उस व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव डालता है । व्यक्ति के जीवन में किस क्षेत्र में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा इस बात का अनुमान इस बात से लगाया जाता है कि वह किस भाव में बैठा है ।किस राशि में  बैठा है। राहू शुभ फल कारक है या अशुभ फल कारक है। 

राहू एक नकारात्मक ग्रह है।यह किसी इंसान की बुद्धि को नकारात्मक तौर से प्रभावित करता है । 

राहू किसी इंसान को विषय विकारों में डालता है ।
भोग विलास की ओर उस को आकर्षित करता है ।
ऐसे व्यक्ति जिनपे राहु का बुरा प्रभाव है या राहु की दशा चल रही है , वह शराब नशा जुआ आदि गलत आदतों का शिकार हो जाते हैं ।
ऐसे व्यक्ति बुरी संगत में पड़ सकते हैं ।
राहू इंसानों का चारित्रिक पतन करा सकता है ।

अब ये जानते हैं कि,

द्वितीय भाव का राहु किसी व्यक्ति के जीवन में कैसा प्रभाव डालता है?

rahu dusre bhav me

राहु करवाता है अकस्मात धन लाभ :
Sudden financial gains:

राहु व्यक्ति के जीवन में अचानक से होने वाले उतार-चढ़ाव को बताता है। 
किसी व्यक्ति की कुंडली में दूसरे भाव में बैठा राहू इस बात की ओर इशारा करता है कि ऐसे व्यक्ति को अचानक से धन संपदा का लाभ हो सकता है । 

या फिर इसका बिल्कुल उल्टा भी हो सकता है । ऐसे व्यक्ति के हाथों से अचानक से विरासत का धन और संपत्ति निकल सकती है। 

क्योंकि राहु अचानक से धन लाभ फिर अचानक धन का नुकसान भी कराता है । अब इन दोनों में से क्या होगा यह कुंडली में ग्रहों की स्थिति , राहु शुभ स्थिति में है या अशुभ स्थिति में,  इस पर निर्भर करता है।

राहु मन में पैदा करता है विरासत के धन का लालच :
Desire for ancestral property and money:

यदि दूसरे भाव में राहु बैठा है तब यह इस बात की ओर इशारा करता है, कि ऐसे व्यक्ति को विरासत में या पिता, दादा से मिलने वाले धन संपदा में बहुत रुचि होगी ।उसका लालच होगा ।

राहू इच्छाओं को, भूख को और ज्यादा से ज्यादा पाने की लालसा को दर्शाता है। तो राहू यदि दूसरे भाव में बैठा है तो इस बात की ओर इशारा करता है कि ऐसे व्यक्ति के मन में विरासत और पैतृक संपत्ति पाने की विशेष लालसा होगी।

राहू बनाता है वाणी को प्रभावशाली :

dwitiya bhav mein rahu

राहू किसी व्यक्ति की कुंडली में उसकी वाणी को भी दर्शाता है ।तो जब दूसरे भाव में राहु बैठा होता है तो उस व्यक्ति की बातों को प्रभावशाली बनाता है ।

कुंडली में राहु यदि ज्यादा बलवान है तो ऐसे व्यक्ति को एक बहुत अच्छा प्रवक्ता, बहुत अच्छा इनफ्लुएंसर बना सकता है। उसकी वाणी बहुत प्रभावशाली हो सकती है। जिससे लोग उसकी ओर आकर्षित हो सकते हैं।

और अगर राहू कमजोर है और बुरी स्थिति में है तो ऐसे में ऐसे व्यक्ति की वाणी को बिगाड़ सकता है। जिससे ऐसा व्यक्ति अपने लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।अपना जीवन, अपना करियर खराब कर सकता है।अपने संबंध बिगड़ सकता है।

0 टिप्पणियाँ