राहु महादशा में शनि की अंतर्दशा का फल • राहु शनि दशा • राहु में शनि का अंतर • rahu mahadasha me shani ki antardasha • rahu-shani dasha •
राहु महादशा में शनि की अंतर्दशा का फल
राहु कोई ग्रह नहीं है । बल्कि एक छाया ग्रह है।
राहु और केतु को चंद्रमा की छाया माना जाता है। इसलिए राहु को नॉर्थ नोड ( rahu - north node of the moon ) और केतु को साउथ नोड ( ketu- south node of the moon ) कहते हैं।
राहु का स्वभाव
राहु एक ऐसा ग्रह है ,जो किसी व्यक्ति के दिमाग को प्रभावित करता है। उसकी बुद्धि को प्रभावित करता है।उसकी सोच को ,उसके नजरिए को प्रभावित करता है।
राहु राक्षस का सर है।
Rahu is called dragon's head
पौराणिक कथाओं में अगर आप देखे तो राहु एक राक्षस का कटा हुआ सर है। और केतु राक्षस का कटा हुआ धड़ ।तो इसलिए ही राहु हमेशा सर के हिस्से को प्रभावित करता है।
जब किसी व्यक्ति के जीवन में राहु की महादशा आती है तो उस व्यक्ति को दिमाग में तरह-तरह के भ्रम पैदा होने लगते हैं ।
राहु भ्रम पैदा करता है।
Rahu creates illusions, doubts and confusions.
उसके दिमाग में कोई भी क्लेरिटी नहीं रहती। उसे तरह-तरह के कंफ्यूजन होने लगते हैं। उसे लोगों पर शक होता है । अपनों पर शक होता है ।
ऐसे इंसान को किसी पर भरोसा नहीं हो पाता । डर लगता है। राहु डर की भावना को बढ़ावा देता है।
किसी व्यक्ति के मन में ऐसी चीजों को लेकर भी डर पैदा हो जाते हैं। जो कि निराधार है । राहु क्योंकि दिमाग को प्रभावित करता है । यह इल्यूशन पैदा करता है ।काल्पनिक समस्याओं को जन्म देता है। कई बार जीवन में वास्तविक और कोई समस्या ना भी हो।वह इंसान सोच सोच कर अपने मन में उस समस्या को जन्म दे देता है।
राहु महादशा में शनि की अंतर्दशा का फल
वहीं दूसरी तरफ जब शनि की अंतर्दशा किसी व्यक्ति के जीवन में आती है तो शनि की विशेषता यह है कि वह स्थान परिवर्तन करवाता है।
कर्मों के फल का दाता शनि किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों का फल देता है।
शनि की अंतर्दशा का फल
जब शनि की अंतर्दशा आती है तो जिस व्यक्ति के पुराने कर्म बहुत बुरे रहे हैं उसे बहुत बुरा वक्त देखना पड़ता है । अपने बुरे कर्मों का फल इस समय में भुगतना पड़ता है ।
और अगर किसी व्यक्ति के कर्म अच्छे हैं तो उसे अच्छा समय भी देखने को मिलता है। और उसे अपने अच्छे कर्मों का फल इस समय के दौरान मिलता है।
शनि की अंतर्दशा में स्थान परिवर्तन के योग
जब राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा आती है ,तो ऐसे में स्थान परिवर्तन के प्रबल योग बनते हैं । ऐसे में इंसान को किसी दूसरे देश में नौकरी मिल सकती है । नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। उसका स्थान परिवर्तन हो सकता है। दूसरे किसी देश में ऐसा इंसान घर बसा सकता है। दूसरे देश में उसे सफलता मिल सकती है।
राहु देता है जीवन में सफलता
क्योंकि राहु जब जीवन में आता है तो बहुत अधिक ऊंचाइयों और सफलता तक भी पहुंच जाता है। पर जितनी तेजी से को सफलता की तरफ ले जाता है । उतनी ही तेजी से राहु व्यक्ति को नीचे की तरफ ले आता है। और असफलता का भी मुंह दिखा देता है।
आकस्मिक लाभ :
अचानक से ऊपर की ओर बढ़ना और अचानक से नीचे लाना ही राहु का स्वभाव है।
राहु की महादशा और शनि की अंतर्दशा के दौरान ऐसा हो सकता है कि इंसान को विदेश में नौकरी मिले ,सफलता मिले मगर जैसे ही शनि की अंतर्दशा अपने अंतिम चरण में पहुंचे तो ऐसे इंसान की नौकरी से छूट जाए । और उसकी अपने वतन को वापसी हो जाए।
राहु अस्थिरता देता है
क्योंकि राहु अस्थिरता देता है। दिमाग में अस्थिरता पैदा करता है । तो यदि एक इंसान को विदेश में नौकरी मिलती है । और फिर कुछ समय के बाद वह छूट जाती है उसे सफलता के बाद असफलता का मुंह देखना पड़ता है । तो उसका समय खराब हो जाता है ।
तो राहु ऊँचाइयाँ दिखाता है और फिर आपको नीचे लेकर आता है । तो आपको बहुत गहरी चोट भी दे जाता है। इसलिए कहते हैं राहु का समय बहुत कठिन होता है।
राहु महादशा का फल
राहु आपकी चीजें पहले बनाता है। और फिर बिगाड़ देता है । जब राहु मन में भ्रम पैदा कर देता है, तो इंसान अपने जीवन को और अपने समय को ऐसी जगह और ऐसे कामों में इन्वेस्ट कर देता है ,जो भविष्य में शायद उसके काम आने ही नहीं वाले और फिर एक दिन जब इंसान इस भ्रम से बाहर आता है तो उसे पता चलता है कि उसने में कितना समय राहु की महादशा के दौरान नष्ट कर दिया और उसका भविष्य नहीं बन पाया।
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