rahu ki mahadasha me shukra ki antardasha

राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा के प्रभाव को समझने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है राहु ग्रह का जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है । 

rahu grah ka jiwan par prabhav :

राहु को अंधेरे का कारक माना गया है। जब किसी व्यक्ति के जीवन में राहु की महादशा चल रही होती है , तो ऐसे में उस व्यक्ति के जीवन में किसी तरीके की कोई स्पष्टता नहीं होती है। जीवन की परिस्थितियों को लेकर उस व्यक्ति के दिमाग में कई तरीके की उलझन होती है। 

ऐसे व्यक्ति को अपने जीवन में सही दिशा को समझना बहुत मुश्किल हो रहा होता है , क्योंकि राहु ग्रह व्यक्ति के मन में भ्रम ,वहम ,डर, अज्ञान , असमंजस और अंधकार की स्थिति पैदा करता हैं । जिससे उस व्यक्ति को जीवन की वास्तविक स्थिति को समझना मुश्किल हो जाता है।

दिमाग में clarity यानी स्पष्टता के अभाव की वजह से ऐसा व्यक्ति सही ढंग से जीवन की परिस्थितियों को समझ पाने में सक्षम नहीं हो पाता और इस वजह से जिंदगी में मुश्किलें बढ़ने लगती हैं। 


rahu ka dimag par prabhav 

राहु ग्रह दिमाग को प्रभावित करता है ,क्योंकि राहु पौराणिक कथाओं में सिर्फ एक सिर है । एक राक्षस का कटा हुआ सर। तो यह राहु मस्तिष्क को, बुद्धि को और मन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। 

ऐसे इंसान के विचार कई बार उसको गलत दिशा में ले जाते हैं । ऐसा इंसान खुद को परेशान करने वाले विचारों में ही उलझ जाता है। समस्याएं तो होती है मगर उनके  सही समाधान तक पहुंच पाना ऐसे व्यक्ति के लिए मुश्किल हो जाता है। 

जिस व्यक्ति पर राहु की महादशा चल रही हो उसके मन में नकारात्मक विचार पैदा करना और मानसिक विकार पैदा करना राहु का काम है। 

दूसरी तरह से देखा जाए तो राहु एक व्यक्ति को विचारशील बनाता है । ऐसा व्यक्ति हर चीज को सोच समझकर करता है । बहुत ज्यादा नापतोल करके समझ बूझ कर ही किसी चीज में अपने कदम बढ़ाता है । लेकिन चूंकि राहु नकारात्मक ग्रह है , तो कहीं ना कहीं नकारात्मकता और परेशानियां ही मस्तिष्क को सारा समय घेरी रहती हैं और उनसे मुक्ति पाना ऐसे व्यक्ति के लिए मुश्किल हो जाता है। 


rahu ki mahadasha me shukra ki antardasha 

राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा का प्रभाव समझने के लिए यह भी जरूरी है कि शुक्र ग्रह के स्वभाव को समझा जाए। 

shukra grah ka prabhav

शुक्र ग्रह एक सौम्य ग्रह है। यह भोग विलास समृद्धि और सुंदरता के क्षेत्र को प्रभावित करता है । 

किसी पुरुष की कुंडली में शुक्र ग्रह जीवन में स्त्रियों की उपस्थिति और उनके प्रभाव को बताता है। शुक्र एक पत्नी का भी कारक है। 

जिस व्यक्ति की कुंडली में शुक्र का अच्छा प्रभाव हो तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में भोग विलास के आराम के सभी साधन उपलब्ध रहते हैं । 

shukra ki antardasha 

जब राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा आती है तो राहु और शुक्र के इस जोड़ से शुक्र का प्रभाव और ज्यादा बढ़ जाता है , क्योंकि राहु एक ऐसा ग्रह है कि वह जिस भी ग्रह के साथ होता है वह उस ग्रह के प्रभाव को बढ़ा देता है । 

परंतु राहु एक नकारात्मक ग्रह है तो यह अपने साथ आए किसी भी ग्रह के प्रभाव को नकारात्मक तौर से ज्यादा बढ़ाता है। 


जैसे उदाहरण के तौर पर जब राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा आती है तो ऐसा व्यक्ति भोग विलास और आराम के साधनों पर निर्भर हो जाता है । क्योंकि ऐसे व्यक्ति की भोग विलास और धन संपदा और आराम के साधनों या आरामदायक जीवन के प्रति इच्छाएं बहुत बढ़ जाती हैं। 

और इस कारण से ऐसे व्यक्ति का जीवन में असंतोष पैदा हो जाता है। जीवन में संतोष नहीं रहता । ऐसे व्यक्ति के मन में हमेशा एक बेचैनी और असंतोष बना रहता है। 


शुक्र ग्रह को एक शुभ ग्रह मानते हैं । और इस वजह से जब राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा शुरू होती है , तो एक प्रकार से वह राहु के बुरे प्रभावों को थोड़ा संतुलित करती हैं ।  क्योंकि शुक्र एक सौम्य ग्रह है ,और वह जीवन में खुशियां खूबसूरती और शुभ प्रभावों को लाता है । और राहु जीवन में सिर्फ संघर्ष और असंतोष और विषम मानसिक परिस्थितियों को जन्म देता है । जबकि शुक्र के साथ आने से कहीं ना कहीं परिस्थितियों में एक संतुलन भी पैदा होता है। 

जब राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा आती है , तो ऐसे व्यक्ति को सौंदर्य , भोग, विलास, स्त्री के प्रति लालसा पैदा हो सकती है। और इस अंतर्दशा के दौरान इंसान के जीवन का सारा ध्यान केवल सुख के साधनों को उपलब्ध करने में ही लगा रहता है। पर राहु के प्रभाव के कारण मन और मस्तिष्क में असंतोष की स्थिति लगातार बनी रहती है चाहे कितना भी धन साधन अर्जित कर लिया जाए। 


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