कथा सरित सागर के प्रेरणा दायक और ज्ञान वर्धक श्लोक कथन। • wisdom quotes ( shloka) of Katha Sarit Sagar •
स्पृशंति ना नृशंसाना हृदयम् बंधु बुद्धय।
क्रूर व्यक्तियों के हृदय में बंधुत्व की भावना स्पर्श भी नहीं करती।
( पाटलिपुत्र निर्माण की कथा )
2•
तपोअधीना हि संपदः।
सिद्धियाँ तप के अधीन होती हैं।
( पाटलिपुत्र निर्माण की कथा )
3•
आश्चर्यं परित्याज्यो दृष्ट नष्टा पदामपी।
अविवेकान्ध बुद्धिनाम स्वानुभाव दुरात्मनाम्।
आश्चर्य है कि अविवेक से अंध बुद्धि वाले दुष्ट आपत्तियों को आते और जाते देख कर भी अपने स्वभाव को नहीं छोड़ते।
( राजा ब्रह्म दत्त की कथा)
4•
अथाहंवदं राजलक्षणे रनुमानतः
प्रतिभाश्च पश्यंति सर्व प्रज्ञा वतां धिय।
बुद्धिमानों की बुद्धि लक्षणों से, अनुमान से और प्रतिभा से सब कुछ जान लेती है।
( राजा आदित्यवर्मा और मंत्री शिव वर्मा की कथा )
5•
अक्लेश लभ्या हि भवंतयुत्तमार्थभवंतयुत्तमार्था महात्मनाम।
जनमंत्रार्जितः स्फार संस्कारा क्षिप्त सिद्धयः ।
पूर्व जन्म के उत्तम संस्कारों से प्राप्त सिद्धि के कारण भाग्यशाली व्यक्तियों के प्रयोजन बिना किसी कष्ट या विघ्न के ही सिद्ध हो जाते हैं।
( शर्व वर्मा की कथा)
( कथापीठ- प्रथम लंबक, सप्तम तरंग, उन्नीसवां श्लोक)
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