Frustration क्या है? 
हिंदी मे frustration का मतलब है :
• कुंठा। 
• निराशा । 
• आशा का अभाव ।
• निराशा से पैदा होने वाली अतृप्ति की भावना । 
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Psycology में frustration का मतलब:
Meaning of frustration in psycology. 

मनोविज्ञान के अनुसार , frustration या कुंठा प्रतिकूल परिस्थिति में होने वाली एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है। जोकि गुस्से ( क्रोध)( anger), चिढ़ ( annoyance) और निराशा ( disappointment ) से संबंधित है। 

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Frustration क्यूँ होता है? 
Frustration के कारण ? 

Reasons of frustration :

√ इच्छाये या ज़रूरते पूरी ना हो पाना :

जब किसी इंसान की इच्छाये पूरी ना हो पा रही हों। या उसकी जरूरते पूरी होने मे अड़चने पैदा हो रही हों, तो ऐसे मे frustration होता है और बढ़ता है। 

√ परिस्थितियों का अपने मन के अनुकूल ना होना। 

जब किसी इंसान की इच्छा अनुसार कोई कार्य नहीं होता है। या कोई इंसान कुछ जैसा चाह रहा हो वैसा नही होता या हो नही पाता। तो ऐसी स्थिती में उसको frustration होता है।

√ लक्ष्यों का पूरा ना हो पाना। 

किसी इंसान ने कोई लक्ष्य निर्धारित किये हो। Goals बनाये हो। और वो पूरे ना हों या ना हो पा रहे हो । ऐसे में जीवन मे असफलताओ के चलते किसी इंसान को खुद में कमियाँ दिखने लगी हो। आत्मविश्वास का अभाव हो गया हो। तो frustration पैदा होता है। 

√ सामाजिक दबाव। 

जब निर्धारित लक्ष्यों के पूरे ना हो पाने की स्थिति में समाज का भय मन में बैठ जाए। या वो खुद को दूसरों से छोटा या कम महसूस करने लगे। या लगातार अगर कोई खुद को दूसरो से तुलना करे और खुद को कम महसूस करे।तो उसे frustration होता है।

√ स्वाभिमान या self worth और आत्मविश्वास या self confidence का अभाव। 

जब इंसान खुद को ही नकाबिल् मान ले। उसमे आत्मविश्वास की कमी हो जाए तो ऐसे इंसान के मन मे frustration जन्म लेता है। 

√ conflict या विरोधाभास की स्थिति। 

जब कोई इंसान ऐसे लक्ष्य निर्धारित कर ले या ऐसी इच्छाये रखने लगे जो परस्पर विरोधी हों। 

√ परिस्थितियों का नियंत्रण के बाहर होना। 

ऐसी situations जो इंसान के कंट्रोल से बाहर हों ।
जैसे कहीं road block हो जाए। इंसान को लगने लगे कि उसका time waste हो रहा है। या कोई ऐसा काम किसी को करना पड़े जो उसे कठिन लग रहा हो या पसंद ना हो। तो उसे frustration होता है। 

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Frustration कितने तरह का होता है? 
Two types of frustration

1. Internal frustration या भीतरी कुंठा

2. External frustration या बाहरी कुंठा

Internal frustration होता है जब:

• किसी इंसान ने कोई लक्ष्य निर्धारित किये हो। Goals बनाये हो। और वो पूरे ना हों या ना हो पा रहे हो । 

• जब जीवन मे असफलताओ के चलते किसी इंसान को खुद में कमियाँ दिखने लगी हो। आत्मविश्वास का अभाव हो गया हो। 

• जब निर्धारित लक्ष्यों के पूरे ना हो पाने की स्थिति में समाज का भय मन में बैठ जाए।  स्वाभिमान या self worth का अभाव हो गया हो। 

• जब इंसान खुद को ही नकाबिल् मान ले। 

• जब कोई इंसान ऐसे लक्ष्य निर्धारित कर ले या ऐसी इच्छाये रखने लगे जो परस्पर विरोधी हों। 

ऐसी स्थिती में internal frustration पैदा होता है। 

External frustration पैदा होता है जब :

• ऐसी situations जो इंसान के कंट्रोल से बाहर हों ।

• जैसे कहीं road block हो जाए। इंसान को लगने लगे कि उसका time waste हो रहा है। 

• कोई काम किसी को करना पड़े जो उसे कठिन लग रहा हो या पसंद ना हो। 

तो ऐसे मे जो frustration पैदा होता है। External frustration कहलाता है। 

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