बुद्ध की कहानियाँ  • buddha ki kahaniyan •
Stories of buddha in hindi • Buddha Stories •

धम्मपद की कहानियाँ • Dhammapada ki kahaniyan • Dhammapada Stories in hindi •

• बुरी भावना से किया गया कर्म , सदा दुख का कारण बनता है ।•

• Any act done with an impure mind, leads to suffering •


चक्षुपाल की कहानी
Chakshupal's story hindi

बुद्ध के एक शिष्य थे। जिनका नाम चक्षुपाल था । चक्षु का मतलब होता है आँखें । पर चक्षु पाल अंधे थे।

एक बार चक्षु पाल बुद्ध के दर्शन की इच्छा से जेतवन आश्रम पहुंचे। और बुद्ध को अपना श्रद्धा प्रणाम देने के बाद से आश्रम मे ही रुक गए । 

एक रात चक्षुपाल आश्रम के बाहर ध्यान में मग्न टहल रहे थे । और चलते चलते उन्होंने जमीन पर चलने वाले कुछ कीड़ों और मकोड़ों को कुचलते हुए चल दिये। 


चक्षु पाल तो अंधे थे। और वह जमीन पर चलने वाले उन कीड़ों को देख नहीं पाए । 

अगली सुबह जब आश्रम के दूसरे शिष्यों ने कीड़ों को मरे हुए देखा ,तो उन्होंने चक्षुपाल की शिकायत बुद्ध से जाकर की।

बुद्ध ने जब शिष्यों की शिकायत सुनी , तो उन्होंने उनसे पूछा , कि क्या तुम लोगों ने चक्षुपाल को कीड़ों ,मकोड़ों को कुचलते अपनी आंखों से देखा ?

तो सभी शिष्यों ने मना कर दिया कि उन्होंने अपनी आंखों से तो कुछ नहीं देखा। 

तब बुद्ध ने कहा कि जैसे उन्होंने चक्षुपाल को कीड़ों को कुचलते अपनी आंखों से नहीं देखा। वैसे ही चक्षुपाल ने भी उन कीड़ों मकोड़ों को जमीन पर चलते हुए नहीं देखा  था। इसीलिए चक्षु पाल इस पाप के दोषी नहीं है। 

बुद्ध ने शिष्यों को बताया कि चक्षुपाल एक अर्हत है । अर्थात वह एक उन्नत आत्मा हैं। उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हो चुका है। अतः चक्षुपाल किसी भी प्राणी के प्रति हिंसा की भावना से कोई कर्म नहीं कर सकते। 


तब बुद्ध के शिष्यों ने उनसे पूछा कि अगर चक्षुपाल एक अर्हत हैं तो आखिर किस पाप के कारण वह अंधे है ? 

तब बुद्ध ने उन शिष्यों को चक्षुपाल के एक पूर्वजन्म की कहानी बताई। 

बुद्ध बोले कि चक्षुपाल अपने एक पूर्व जन्म में एक चिकित्सक के रूप में लोगों का इलाज करता था । उसने तब जानबूझकर एक औरत को अंधा बना दिया था । 

वह औरत उसके पास अपनी आँखों के इलाज करवाने
 के लिए आई थी। और उसने चिकित्सक को यह वादा किया था कि अगर उसकी आंखें पूरी तरह से ठीक हो गई तो वह अपने बच्चों के साथ जीवन भरउसकी दासी बनके रहेगी।

धीरे-धीरे उस औरत की आंखें पूरी तरह ठीक हो गई । मगर वह औरत डर गई, कि अब उसे अपने वादे के अनुसार जीवन भर चिकित्सक का गुलाम बन कर रहना पड़ेगा । और इस डर से उसने से झूठ कह दिया कि उसकी आंखें ठीक ही नहीं हो रही । 


चिकित्सक समझ गया कि वह औरत अपने वादे से पीछे हट रही है । और बदला लेने के लिए उसने उस औरत को एक ऐसी दवा दे दी, जिससे वह जीवन भर के लिए अंधी हो गई। 

और अपने इसी पाप के कारण चक्षुपाल को अगले कई जन्मों तक अंधा बनकर पैदा होना पड़ा।

चक्षुपाल के पूर्व जन्म की कहानी सुनाने के बाद बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा, 

" मन ही मुख्य है । 
 इंसान की सभी प्रवृत्तियाँ , मन से ही पैदा होती हैं। 

कोई भी इंसान अगर, 
अशुद्ध मन के साथ कुछ बोलता या करता है । 

तो दुख उसी तरह से , 
उसके पीछे चलने लगता है। 

जैसे बैल गाड़ी के पहिए ,
बैल के पैरों के पीछे पीछे चलते हैं। "
(  धम्मपद, छंद 1 ) 

उस दिन बुद्ध के उपदेश सुनने के बाद कई दूसरे शिष्य भी अर्हत हो गए। अर्थात उन्हें भी आत्मज्ञान की प्राप्ति हो गई। 

कहानी की सीख
Moral of the story

ये कहानी हमें यही बताती है कि अनजाने में बिना किसी बुरी भावना के यदि कोई गलत कर्म हो जाता है तो वह पाप नहीं कहलाता ।  जैसे चक्षुपाल ने अनजाने में जीवों को कुचल देने का काम किया ,वो पाप नहीं था।  क्योंकि उसमें किसी गलत भावना से ये कर्म नहीं किया था। 

लेकिन अगर किसी बुरी भावना के चलते कोई किसी के साथ कुछ गलत करता है । तो उसे उस गलत कर्म का फल, लगातार दुख के रूप में भोगना ही पड़ता है।  जैसे चक्षुपाल को भुगतना पड़ा , कई जन्मो तक उसे अंधा बनके पैदा होना पड़ा। 

टिप्पणी
Commentary

हम सभी जीवन मे अच्छे बुरे कर्म करते हैं । हम सब से भी गलतियां होती हैं ।  
पर महत्व पूर्ण है इंसान की भावना। 
अगर आपका मन शुद्ध है,  तो भूल भी क्षमा हो जाती है।
लेकिन अगर आपकी भावना गलत है तो उसे गलत भावना से आप जो भी कर्म करेंगे या कहेंगे। उसका बुरा फल आपको भोगना ही पड़ेगा। 
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References:

1. The Dhammapada : verses and stories, Translated by Daw Mya Tin

2. Treasury of truth, the illustrated Dhammapada, by Ven. Weragoda Sarada Thero. 


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