जब राहु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा शुरू होती है , तो पड़ता है कैसा असर। Effects of Guru antardasha in Rahu mahadasha
राहु की महादशा में बृहस्पति की अंतर्दशा ( राहु-गुरु दशा) :
( Rahu mahadasha & Guru antardasha : Rahu-Guru Dasha )
जब किसी व्यक्ति के जीवन में राहु की महादशा का समय आता है । तभी से उस व्यक्ति के जीवन में राहु के प्रभावों का पढ़ना शुरू हो जाता है ।
राहु की दशा वैसे तो 18 साल की होती है पर इस महादशा के अंतर्गत सभी नौ ग्रहों की अंतर्दशा भी एक के बाद एक आती रहती हैं । राहु की महादशा में सबसे पहले राहु की अंतर्दशा शुरू होती है । ग्रहों की दशाओं का एक निश्चित क्रम होता है और एक निश्चित समय । इस विषय में जानकारी के लिए आप मेरे दूसरी ब्लॉग पोस्ट को भी पढ़ सकते हैं।
rahu ki mahadasha mein guru ki antardasha
राहु की महादशा के अंतर्गत राहु की अंतर्दशा खत्म होने के बाद बृहस्पति की अर्थात गुरु की अंतर्दशा शुरू हो जाती है। चलिए समझते हैं इसके क्या प्रभाव होते हैं।
राहु के दुष्प्रभाव से बचाता है गुरु:
( Guru antardasha saves from bad effects of Rahu Dasha)
बृहस्पति के अंतर्दशा शुरू होने के बाद इंसान को कहीं ना कहीं राहु के प्रभाव से थोड़ी राहत मिलती है।
क्योंकि राहु पापी ग्रह है । जबकि बृहस्पति को ज्योतिष शास्त्र में सबसे अधिक शुभ ग्रह माना जाता है । जहां एक ओर राहु एक राक्षस है। वहीं बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं ।
बृहस्पति मिटाता है भ्रम, देता है मार्गदर्शन:
( Guru clear the confusion and provide guidance) :
जहां एक ओर राहु की वजह से जीवन में मुश्किल और परेशानियां और मन मस्तिष्क पर एक अंधकार सा बना रहता है । राहु के कारण व्यक्ति के जीवन में भ्रम की स्थिति बनी रहती है । एक कन्फ्यूजन चलता रहता है । वही बृहस्पति की अंतर्दशा आ जाने के कारण राहु के बुरे प्रभावों में कुछ कमी आ जाती है ।और गुरु के शुभ प्रभाव के कारण व्यक्ति के जीवन में ईश्वर की ओर से कुछ न कुछ मार्गदर्शन मिलने लगता है । सद्बुद्धि आने लगती है ।
गुरु के प्रभाव से लौटने लगता है संतुलन:
( Guru restores the balance in life) :
जहां एक ओर राहु किसी इंसान को अपने चरित्र से , अपने आध्यात्मिक स्तर से कहीं ना कहीं नीचे लेकर जा रहा होता है । बृहस्पति के आ जाने से उस व्यक्ति के अंदर कुछ न कुछ सुधार आने लगता है । उसका आध्यात्मिक स्तर थोड़ा मजबूत होने लगता है । और इस तरह कहीं ना कहीं इंसान के जीवन में एक संतुलन या एक बैलेंस वापस आने लगता है ।
छटने लगता है दिमाग पर छाया धुंध:
( Guru clear the fog created by Rahu and gives mental clarity)
जहां राहु की वजह से राहु - राहु दशा में राहु का अकेला प्रभाव होने के कारण इंसान सही गलत का भेद नहीं कर पाता । उसका दिमाग द्वंद में उलझा रहता है । वही बृहस्पति की अंतर्दशा आने पर इंसान के मन से मस्तिष्क से वह द्वंद, वह भ्रम की स्थिति कहीं ना कहीं दूर होने लगती है । और उसको एक मेंटल क्लेरिटी मिलने लगती है । उसके दिमाग में बहुत से भ्रम दूर होने लगते हैं । बहुत से कन्फ्यूजन क्लियर होने लगते हैं ।उसकी बुद्धि में स्थितियां साफ होने लगती हैं । गुरु की अंतर्दशा में व्यक्ति कहीं ना कहीं चीजों को सही परसेप्शन से अर्थात सही परिपेक्ष में देख पाता है।
गुरु लेकर आता है सही रास्ते पर :
( Guru brings you back to the right path)
राहु- राहु के दौरान जहां इंसान एकदम पथ भ्रमित हो जाता है । वही गुरु के आगमन से राहु गुरु दशा के दौरान वो कहीं ना कहीं वापस से अपनी सही राह पर लौटने लगता है । उसे अपनी गलतियों का अहसास होने लगता है । और वह उनकी सुधार की ओर एक शुरुआत कर पाता है। ऐसा कह सकते हैं कि जब गुरु की अंतर्दशा आती है । तब गुरु राहु के बुरे प्रभावों को निश प्रभाव करने लगता है।
गुरु चरित्र में सुधार की ओर प्रेरित करता है:
Guru helps in improving character:
राहु - राहु दशा के दौरान व्यक्ति का चारित्रिक पतन होता हो सकता है। पर गुरु की अंतरदशा शुरू होने के बाद अगर व्यक्ति राहु राहु दशा के दौरान बुरी संगति में रहा भी है । तो राहु गुरु की दशा शुरू होने पर ऐसे व्यक्ति उस बुरी संगति से बाहर निकलने लगता है। उसे एहसास होने लगता है कि उसके लिए क्या सही है और क्या नहीं।
होने लगता है वास्तविकता से सामना:
Guru brings clarity to the current situation
राहु की दशा में राहु की अंतर्दशा के दौरान व्यक्ति के जीवन में परिस्थितियां ऐसी बनी रहती हैं कि वास्तविकता का व्यक्ति को सही ढंग से ज्ञान नहीं हो पाता । पर गुरु की अंतर्दशा आने के बाद गुरु के मार्गदर्शन की वजह से व्यक्ति को वास्तविकता का ज्ञान होने लगता है। रहस्य से पर्दा उठने लगता है।
आखिर में कह सकते हैं जहां एक ओर राहु की महादशा की वजह से कई तरह की परेशानियां शुरू हो जाती हैं वही गुरु के अंतर्दशा आने की वजह से कहीं ना कहीं यहाँ राहु के दुष्प्रभावों से थोड़ा आराम मिलना शुरू हो जाता है।
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3 टिप्पणियाँ
आलेख अच्छा है, किन्तु जीवन में आवश्यक अनुक्रमों, जैसेकि स्वास्थ्य, अर्थ, वित्त, कार्य-व्यापार आदि के अनुरूप यदि प्रस्तुति हो तो
जवाब देंहटाएंआलेख महादशा-अंतर्दशा के अंतर्गत आ रहे व्यक्तियों के लिये अधिक सार्थक एवं उपयोगी होगा।
आपका पॉइंट नोट कर लिया है । सुधार की कोशिश रहेगी । धन्यवाद ।
हटाएंअच्छा लिखा है.
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