क्या होता है राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा का जीवन पर असर! Effects of Rahu Antardasha in Rahu Mahadasha Period ! ( Rahu- Rahu Dasha )
जब किसी व्यक्ति के जीवन में राहु की महादशा आती है है। तो वह 18 वर्षों तक चलती है। इसके अंतर्गत सभी 9 ग्रहों की अंतर दिशाएं भी शुरू हो जाती हैं ।
किसी भी ग्रह की महादशा में उसी ग्रह की अंतर्दशा सबसे पहले आती है । अतः राहु की महादशा में सबसे पहले राहु की अंतर्दशा शुरू होती है । उसके पश्चात बृहस्पति की फिर शनि की अंतरदशा और इसी तरह सभी नौ ग्रहों की अंतर्दशा क्रम से आती हैं ।
ग्रहों की महादशा और अंतर्दशा का क्रम क्या होता है यह जाने के लिए आप मेरा दूसरा आर्टिकल भी पढ़ सकते हैं ।
राहु- राहु दशा मे व्यक्ति के जीवन पर राहु ग्रह का प्रभाव दुगना हो जाता है। राहु - राहु दशा काल का क्या प्रभाव होता है यह जानने के लिए सबसे पहले यह जान लेना बहुत जरूरी है कि राहु ग्रह किसी व्यक्ति के जीवन पर क्या प्रभाव डालता है अतः राहु ग्रह के क्या गुण है।
राहु है राक्षस का सिर :
राहु शनि का छाया ग्रह है। यह कोई असली ग्रह नहीं बल्कि ग्रह की छाया मात्र है । राहु को पौराणिक शास्त्रों में राक्षस का सर माना गया है । और केतु को धड़। यही कारण है कि राहु सबसे ज्यादा व्यक्ति के सर के हिस्से को ही प्रभावित करता है ।
पैदा करता है डर और भ्रम की स्थिति:
राहु को भय और अंधकार का प्रतीक भी माना जाता है । राहु- राहु दशा मे व्यक्ति की बुद्धि में डर और संशय की स्थिति पैदा हो सकती हैं । जिस प्रकार अंधकार में व्यक्ति को रास्ता नहीं दिखाई देता , राहु - राहु दशा मे व्यक्ति ठीक तरह से परिस्थितियों का आकलन नहीं कर पाता। और ठीक-ठीक निर्णय लेने में खुद को असमर्थ महसूस करता है।
हो सकता है मानसिक तनाव:
बुद्धि पर विशेष प्रभाव पड़ने के कारण राहु - राहु दशा के अंतर्गत व्यक्ति मानसिक तनाव से ग्रस्त हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को ज्यादा और अकारण चिंता करने की आदत हो सकती है। ऐसे समय में व्यक्ति को ध्यान की प्रक्रिया के द्वारा अपने कंसंट्रेशन और रिलैक्सेशन को बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।
पैदा हो सकता है वाणी दोष :
राहु वाणी को विशेष प्रभावित करता है । राहु- राहु दशा के अंतर्गत व्यक्ति को ज्यादा बोलने की या ऊट पटाँग बोलने की आदत हो सकती है।
ऐसे मे व्यक्ति कई बार बड़ी-बड़ी बातें फेंक देता है । जिसको वह असल में असल जीवन में नहीं अपनाता है । ऐसा भी कह सकते हैं कि बड़बोला हो जाता है।
अतः ऐसे समय में व्यक्ति को सोच समझकर ही बोलना चाहिए। और किसी से कोई ऐसे वादे या कमिटमेंट नहीं करने चाहिए जिसे वह निभाने की नियत ना रखता हो या पूरा करने में समर्थ ही ना हो।
व्यक्ति करने लगता है वाद विवाद:
राहु-राहु की दशा काल में व्यक्ति को तर्क वितर्क करने की अधिक आदत पड़ जाती है। ऐसा व्यक्ति व्यर्थ के वाद विवाद में भी आसानी से पढ़ जाता है। हालांकि वहीं दूसरी ओर ऐसा व्यक्ति किसी वाद विवाद प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन भी कर सकता है।
राजनीति में दिला सकता है सफलता:
ऐसा नहीं कि राहुल सिर्फ विपरीत परिस्थितियां पैदा करता है बल्कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु अच्छी स्थिति में है । तो राहु- राहु की दशा काल में वह राजनीति के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करके अच्छी सफलता भी प्राप्त कर सकता है।
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